Thursday, June 3, 2010

मैं चिंतित हूँ !

वो अमृत तलाशा जा रहा है
जिससे कि इंसान, यानि
भ्रष्ट, कातिल, दुराचारी,व्यभिचारी
और इन सबका बाप राजनेता,
मरेगा नहीं, चिरजीवी हो जाएगा !
गर शरीर का कोई अंग
निष्क्रिय हो जाए कभी,
तो नया अंग उग आयेगा ,
अपने ही जैसा एक और
भ्रष्ट, निकृष्ट व कमीना चाहिए तो
क्लोनिंग की सुविधा भी मौजूद,
तरोताजा रहने की औषधी,
और बुढापा तो कभी नहीं आएगा !!

अभी जब इनके
घृणित, काले कारनामे देखता हूँ,
दिल को कम से कम
यह तस्सल्ली तो रहती है कि
यह दुराचारी ,
भला साथ क्या ले जाएगा ?
यों भी अब हो ही गया है वह मरने को !
मगर, अब मैं चिंतित हूँ ,
जब यह जानता है कि
इसे एक न एक दिन मरना ही है,
तब ये हाल है,
अगर यह चिरजीवी हो गया,
तो फिर क्या हाल होगा, कभी सोचा ?
इन बेहूदी खोपड़ी के
निठल्ले अमेरिकी वैज्ञानिकों को,
कोई और काम क्यों नहीं देते यारों, करने को !!

24 comments:

SANJEEV RANA said...

सचमुच सोच का विषय हैं गोदियाल साहब .

आज मेरी ये अंतिम टिप्पणियाँ हैं ब्लोग्वानी पर.
कुछ निजी कारणों से मुझे ब्रेक लेना पड़ रहा हैं .
लेकिन पता नही ये ब्रेक कितना लंबा होगा .
और आशा करता हूँ की आप मेरा आज अंतिम लेख जरूर पढोगे .
अलविदा .
संजीव राणा
हिन्दुस्तानी

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

यह अन्धे और बहरों की नगरी है!

शिवम् मिश्रा said...

बहुत सार्थक सोच है अगर सच में ऐसा हुआ तो बहुत बुरा होगा !

kunwarji's said...

आपकी चिन्ता जायज़ है जी.....

कुंवर जी,

वन्दना said...

waah..........kya baat kahi hai.........badi gahri soch hai aur sahi hai...........aaj isi ki jaroorat hai.

M VERMA said...

विषय तो चिंता का ही है
पर हो सकता कि दिशा सकारात्मक हो

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

देश में रक्तबीजों की कमी है क्या...

दिगम्बर नासवा said...

वैसे परिवार की बात करें तो अमृत तो है ही ... नेहरू परिवार के पास तो कम से कम .. एक के बाद एक .. सन ४७ से राज कर रहे हैं ....

दिलीप said...

soch ki baat kahi...bahut hi sundar aur jaandaar kavita...

arvind said...

अगर यह चिरजीवी हो गया,
तो फिर क्या हाल होगा, कभी सोचा ?
....???/????....oh.

Dr Satyajit Sahu said...

भ्रष्ट, कातिल, दुराचारी,व्यभिचारी
और इन सबका बाप राजनेता
badhiya.................

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सच है..चिन्ता का विषय तो है...

पढ़ा है की महाभारत काल में विज्ञान अपने चरम पर था...आज भी वैज्ञानिक उतनी खोज नहीं कर पाए हैं...जब ऐसे अनाचारी होते हैं तो उनको खत्म करने के रास्ते भी होते हैं...जयद्रथ के बारे में आप जानते ही होगे....तो आप इतना भी चिंतित ना हों...अमरत्व ले कर कोई नहीं आया...


आपकी रचना सोचने पर मजबूर कर रही है..अच्छी प्रस्तुति

राजेन्द्र मीणा said...

आपकी चिन्ता जायज़ है जी.....मैं भी चिंतित हूँ !!!

L.R.Gandhi said...

ऐसा अमरत्व वरदान नहीं अभिशाप है साहेब....
कहते हैं अश्व्धामा ...विश्व का प्रथम भ्रूण हत्यारा ..आज भी हिमालय की कंदराओं में भटक रहा है उसके माथे से मवाद रिसता है। ऐसा अमरत्व कौन चाहेगा?

राज भाटिय़ा said...

बहुत अच्छी रचना.... अगर यह चिरजीवी हो गया,तो इस के बाप इसे मिलेगे... कोई कब तक सहे गा....एक दिन तो जागेगा इंसान, ओर वो दिन होगा इन का अंतिम दिन!!!!

संजय भास्कर said...

बहुत से गहरे एहसास लिए है आपकी रचना ...

संजय भास्कर said...

आपकी चिन्ता जायज़ है

डॉ टी एस दराल said...

अगर यह चिरजीवी हो गया,
तो फिर क्या हाल होगा, कभी सोचा ?

बेशक बात तो चिंताज़नक है ।

हास्यफुहार said...

सार्थक प्रस्तुति।

अनामिका की सदाये...... said...

कल आपकी रचना चर्चा मंच पर होगी कृप्या देखें.

आभार
अनामिका

मीनाक्षी said...

बुरे कर्म करने वाले अगर अमर हो गए तो फिर उन्हें अच्छा इंसान बनाने के लिए भी कोई न कोई उपाय खोजा ही जाएगा.... आशा है...

Anil Pusadkar said...

सच कह रहे हैं आप।

नीरज जाट जी said...

गोदियाल साहब, चिन्तित ना हों। भारत में यह तकनीकी आते-आते सदियां बीत जायेंगी।

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

aap ko jyada to nahi padha... par jitna bhi padha hai ..usme ye rachna sabse badhiya lagi ...... :)