Friday, June 11, 2010

कभी सोचा ?

आने वाले दौर के लोग पूछेंगे,
कि आज के दौर में ये मंज़र आये क्यों थे !
सब कुछ अगर ठीक-ठाक था,
तो हर तरफ शरीफों ने खंजर उठाये क्यों थे !
तब हम सफाई देंगे कि जी,
गलती सरकार की थी,
वो हँसेंगे और कहेंगे बेशर्मो,
तुमने ताजो-तख़्त पे कंजर बिठाए क्यों थे !!


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आत्मा,
मरने के बाद कहाँ जाती है ?
मेरी मानो तो
ताउम्र साथ निभाती है !
यूँ समझिये कि
यह शरीर एक मोबाईल फोन है,
जीवन-लीला जिसमे
एक सुरीली सी रिंग टोन है !
मस्तिष्क की-गार्ड है,
और आत्मा सिमकार्ड है!
इसमें
प्रकृति को मानो
कृत्रिम उपग्रह अगर,
तो दुनिया का पालनहार
सर्विस प्रोवाईडर !
बस आत्मा का
इस शरीर से इतना सा नाता है,
इंस्ट्रूमेंट ख़राब होने पर
सिमकार्ड को
एक और इंस्ट्रूमेंट में डाल दिया जाता है !!

3 comments:

उम्मेद गोठवाल said...

बेहतरीन.....वक्त से अनुत्तर सवाल करती सशक्त रचना......शुभकामनाएं।

फ़िरदौस ख़ान said...

अति सुन्दर...

रचना दीक्षित said...

लाजवाब !!!!!