Saturday, June 5, 2010

सोचो-सोचो !!

सिर्फ मुद्दा उठाने व चिंता व्यक्त कर देने भर से,
क्या सोचते हो देश-तंत्र सुधर जाएगा ?
जाने-अनजाने ये विनाश का बीज जो बो रहे है,
क्या पौधा बनके हमारे समक्ष नहीं आयेगा?
सोचो-सोचो !

लिख देने या फिर किसी एक के कहने भर से,
क्या यह देश कभी सुधरने वाला है ?
देश सुधारने के लिए क्या आज हमारे बीच कोई,
भगत सिंह व चंद्रशेखर बनने वाला है ?
सोचो-सोचो !

यों भी बताने को दुनिया को हमारा इतिहास,
कभी भी प्रेरणादायक रहा क्या ?
हमारी घृणित राजनीति का चेहरा यहाँ पर,
कहीं भी मुहं दिखाने लायक रहा क्या ?
सोचो-सोचो !

इस गरीब देश की निर्जीव सी अर्थव्यवस्था में,
और होने देंगे हम कितना घोटाला ?
साठ हजार करोड़ रूपये का चूना लगा गया ,
काले चश्मे वाले का मद्रासी ग्वाला !
सोचो-सोचो !

इस लोकतंत्र की (अ)राज(क) नीति की वजह से,
आमआदमी क्या कष्ट नहीं उठाते होंगे?
जब टेड़े मुहं वाले ही आईपीएल-बीपीएल खा गए,
तो सीधे मुहं वाले कितना नहीं खाते होंगे ?
सोचो-सोचो !

किसी ने सोचा था कि १८५७ में शुरू हुआ संग्राम,
१९४७ में जाकर ख़त्म होगा ?
अगर इस नए संग्राम की अब शुरुआत हुई भी तो
यह कब जाकर ख़त्म होगा ?
सोचो-सोचो !

17 comments:

सुनील दत्त said...

गोदियाल जी आपने बहुत अच्छे डंग से समस्या के समाधान का सही रास्ता सुझाया।
हम तो बस इतना कहेंगे कि बहुत से भक्तसिंह व चंदरशेखर आज निकलल चुके हैं घर से देश से गद्दारों का नमो निशान मिटाने को पर बस जरूरत है उनको पहचानकर उनका हौसला बढ़ाने की।

honesty project democracy said...

गोदियाल जी वैसे अपने-अपने विचार हैं लेकिन हमारा मानना है की आज साडी समस्याओं के जड़ में व्यवस्था पर आम आदमी के निगरानी का खत्म हो जाना ओर जो कुछ लोग सच्ची निगरानी करने की कोशिस कर रहें है उनको आम लोगों का समुचित सहयोग का नहीं मिलना प्रमुख है | इसलिए आज सबसे पहले जरूरत है की जनहित के मुद्दे पर हमसब अपने-अपने मतभेद को भूलकर एकजुट हो कर व्यवस्था को चला रहे लोगों से जवाब मांगना शुरू करें तो काफी हद तक सुधार हो सकता है | आज ग्राम पंचायत से लेकर जिला अधिकारी तक को पता है की कोई पूछने वाला नहीं है इसलिए साडी व्यवस्था मनमाने ढंग से भ्रष्टाचार की लूट में शामिल होकर चल रही है ओर ये मानवीय स्वभाव है की अगर आपका कोई आलोचक या जाँच करने वाला ना हो तो आप तानाशाह बन जाते है इसलिए नियंत्रण ओर संतुलन बहुत जरूरी है |

माधव said...

nice

L.R.Gandhi said...

ye tedhe munh vaale MCL(most crupt leader)aur MCB( most crupt babu)hi IPL aur BPL ke janak hain....
inke virudh janandolan jaari rakhein... sadhuvaad.

पी.सी.गोदियाल said...

मैंने गलत क्या लिखा था ? एक गद्दार की औलाद ने blogvani par माइनस पोइंट भी दे दिया,
सोचो-सोचो !

पी.सी.गोदियाल said...

उस गद्दार की औलाद को भी शर्म आ गई, अपना माइनस पॉइंट वापस ले लिया, सोचो-सोचो !

राज भाटिय़ा said...

पी.सी.गोदियाल जी आप ने बहुत अच्छा लिखा, धन्यवाद

शिवम् मिश्रा said...

बेहद उम्दा रचना सर जी | सच में इस विषय पर केवल सोचने से कुछ हासिल नहीं होगा ............हम सब को अपने अपने स्थर पर कुछ ना कुछ करना ही होगा |

M VERMA said...

माइनस प्वाइंट से विचलित न हों. जिनकी सोच माईनस में होती है उनसे उम्मीद क्या कर सकते हैं.
सुन्दर रचना

जी.के. अवधिया said...

सिर्फ सोचने से काम नहीं चलेगा, जागरूकता लाना जरूरी है।

honesty project democracy said...

अरे गोदियाल जी हमें तो आपके पोस्ट पर (-)का स्कोर नहीं दिख रहा है ,हमारे नजर में आपने सही जगाने का प्रयास किया है लिखने वालों को ,की सिर्फ लिखो ही नहीं कुछ करने की भी सोचो और ऐसे में कोई मुर्ख ही (-)का चटका लगाएगा | अगर किसी ने लगा भी दिया तो मेरा (+) का चटका उसे बराबर कर देगा ,आप चिंता न करें जनहित के हर छोटे से प्रयास को भी हमारा (+) है और (-) का प्रयोग तो लोगों को करना ही नहीं चाहिए ,लेकिन क्या करें कोई करता है तो उसकी अपनी मर्जी कभी-कभी हमें भी मिल जाता है (-) जिसे हम स्वीकार भी कर लेते हैं | वैसे जनहित के लिए लिखते हुए अगर (-) मिले तो दुःख तो होता है |

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

जागरूक करने वाली अच्छी रचना....सोचना शुरू करेंगे तभी तो क्रियान्वन कर पाएंगे

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 06.06.10 की चर्चा मंच (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
http://charchamanch.blogspot.com/

अरुणेश मिश्र said...

उत्तेजना नही धैर्य ।
बहुत अचछा लिखा . प्रशंसनीय ।

संजय भास्कर said...

जागरूक करने वाली रचना

Udan Tashtari said...

बेहतरीन!

योगेश शर्मा said...

Gogiyal ji Bahut hee badhiya..lekin jinhone sochaa nahin aur kar guzre wahi Bhagat Singh aur Azaad bane...ham bas sochte hee rehte hain..socho socho