Saturday, March 3, 2012

शिव अराधना !














अनुतप्त न होगा कभी तेरा मन,

कर भोर भये भोले का सुमिरन|

रख शिव चरणों में मनोरथ अपना,

निश्चित मनोकामना होगी पूरन||



सरल सहृदय मन कृपालु बड़े है,

जय भोलेनाथ सन्निकट खड़े है|

अनसुलझी रहे न कोई उलझन,

कर भोर भये भोले का सुमिरन||


सिंहवाहिनी सौम्य छटा में रहती,

तारणी प्रभु शीश जटा से बहती|

ढोल, शंखनाद, घडियाली झनझन,

कर भोर भये भोले का सुमिरन||


नील कंठेश्वर इस जग के रब है,

धन-धान्य वही, वही सुख-वैभव है|

प्रभु-पाद सम्मुख फैलाकर आसन,

कर भोर भये भोले का सुमिरन||



तारणहार जयशंकर विश्व-विधाता,

सर्व शक्तिमान शिव जग के दाता|

न्योछावर करके अपना तन-मन,

कर भोर भये भोले का सुमिरन||
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