Saturday, May 8, 2010

निरुपमा के बहाने एक गजल !


मित्रो, व्यस्तता की वजह से आज ब्लोग-जगत पर मेरी उपस्थिति कम ही रही, मगर मैं समझता हू कि अभी भी यहां इस ब्लोग जगत पर पत्रकार निरुपमा की असामयिक और दर्दनाक मौत से समबन्धित चर्चाओं का बाजार काफ़ी गरम है। जैसा कि मैने कुछ ब्लोग मित्रों के ब्लोगो पर कुछ टिप्पणियों मे भी कहा और अब भी कह रहा हूं कि मीडिया के साथ-साथ अनेक ब्लोगर मित्रों ने बिना सोचे-समझे निष्कर्षो पर पहुंच इस पूरे प्रकरण को एकपक्षीय बनाकर जरुरत से ज्यादा तूल दिया। खैर, भग्वान निरुपमा की आत्मा को शान्ति प्रदान करे, यही प्रार्थना करता हूं, और इस पूरे घटना के मद्यनजर पेश है एक गजल;

त्याग कर पुरा-रीतियां, निकली नये अभियानों पर ।
बदलने लगी है दुनिया, सभ्यता के दरमियानों पर ॥

न स्वयम्बर की दरकार रही, न युवराजों की जंग ।
जंक खाती जा रही तलवारें ,पडे-पडे मयानों पर ॥

क्या पूनम, क्या अमावस, शुक्ल क्या कृष्ण पक्ष ।
सूरज ग्रहण लगा रहे है, चांद के आशियानों पर ॥

कह रहे थे लोग,माली ने खुद गुलशन उजाड डाला।
करें भी कोई ऐतवार कैसे, अपने इन सयानों पर॥

सबूत मिटा डाले उसी ने, जिस पर दारोमदार था ।
मुकदमा दर्ज हुआ भी तो, गिरगिट के बयानों पर ॥

17 comments:

दिलीप said...

waise mujhe bhi bahut dukh hai jo kuch bhi hua...lekin agar ye hamari beti ne kiya hota to kya karte...bas ek masoom sa prashn hai...

Suman said...

सबूत मिटा डाले उसी ने, जिस पर दारोमदार था ।
मुकदमा दर्ज हुआ भी तो, गिरगिट के बयानों पर. satay hai.nice

Gourav Agrawal said...

Dukhad ghatnaa hai ......

सबूत मिटा डाले उसी ने, जिस पर दारोमदार था ।
मुकदमा दर्ज हुआ भी तो, गिरगिट के बयानों पर ॥

antim lines bahut sashakt hai

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

बहुत सुन्दर रचना है ... खास कर ये पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगी
सबूत मिटा डाले उसी ने, जिस पर दारोमदार था ।
मुकदमा दर्ज हुआ भी तो, गिरगिट के बयानों पर ॥

राज भाटिय़ा said...

अजी हो सकता है किसी ने कुछ भी ना किया हो उसी लडकी ने आत्महत्या की हो , मां बाप के डांटने के बाद या किसी अन्य कारण से.बिना सबुत क्यो किसी को दोषी कहे

सुनील दत्त said...

न स्वयम्बर की दरकार रही, न युवराजों की जंग ।
जंक खाती जा रही तलवारें ,पडे-पडे मयानों पर ॥

विसकुल सही बात कही है आपने

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

achha vishay chuna aapne..badhai

अजय कुमार झा said...

बहुत ही सशक्त और सटीक अभिव्यक्ति गोदियाल जी । और अंतिम पंक्तियां तो कहर ढा रही हैं

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

पता नहीं, लेकिन दुखद तो अवश्य है..

अजय कुमार said...

अच्छी गजल ,दुखद है सब कुछ ।

और हां सुमन जी NICE के अलावा भी कुछ लिखते हैं ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सुन्दर रचना!
मातृ-दिवस की बहुत-बहुत बधाई!
ममतामयी माँ को प्रणाम!

अर्चना तिवारी said...

सबूत मिटा डाले उसी ने, जिस पर दारोमदार था ।
मुकदमा दर्ज हुआ भी तो, गिरगिट के बयानों पर ॥


वेदनायुक्त ग़ज़ल..

दिगम्बर नासवा said...

मुकदमा दर्ज हुआ भी तो, गिरगिट के बयानों पर ..

देश का माहॉल आज ऐसा ही है .... देश का सत्यानाश कर रहे हैं ये राजनेता ...

ताऊ रामपुरिया said...

बेहद सटीकता से बात कह दी आपने.

रामराम.

honesty project democracy said...

बहुत ही उम्दा और सटीक सोच से निकली अभिव्यक्ति /

संजय भास्कर said...

..........प्रभावशाली

संजय भास्कर said...

.........सुन्दर रचना!