Wednesday, May 19, 2010

स्पष्ठीकरण !

इर्द-गिर्द सदा ही घूम पाता, मैंने तो
तुमसे वो धूरी चाही थी, दूरी नहीं,
दिल की बात हम हक़ से कह जाते,
वो सहभागिता चाही थी, मजबूरी नहीं !

मेरे दिल में रखने की आदत बुरी है,
हर ख्वाब दिल के कोने में सजाता हूँ,
इजहार-ए-इश्क पलकें कर लेती है ,
हर बात लबों पे आये, ये जरूरी नहीं !

अक्सर ही ख्वाब तुम्हारे सजाने को,
हरदम आँखे चुराता हूँ रातों को नींद से,
बनाई ख़्वाबों ने जब भी तस्वीर तेरी,
पहुंचाई मुकाम पर है, छोडी अधूरी नहीं !

दिल की दीवारों पर टंगी तेरी तस्वीर में ,
प्रेम की कुंची से इन्द्रधनुषी रंग बुनता हूँ,
हसरते यों तो बहुत रखे था दिल में पाले,
न जाने क्यों ये तमन्नायें होती पूरी नही !

23 comments:

kunwarji's said...

हर पंक्ति लाजवाब है जी,

अनुभव कि झलक साफ़ नजर आ रही है,,,,,

कुंवर जी,

SANJEEV RANA said...

बहुत बढ़िया लिखा आपने

शिवम् मिश्रा said...

"इजहार-ए-इश्क मेरी पलकें कर लेती है ,
हर बात लबों पे आये, ये जरूरी नहीं !"



बेहद उम्दा रचना, सर जी ..............बधाइयाँ !!

arvind said...

दिल की दीवारों पर टंगी तेरी तस्वीर में ,
प्रेम की कुंची से इन्द्रधनुषी रंग बुनता हूँ,
हसरते यों तो बहुत रखे था दिल में पाले,
न जाने क्यों ये तमन्नायें होती पूरी नही !
.....लाजवाब

राज भाटिय़ा said...

जनाब बहुत ही सुंदर गजल. धन्यवाद

सुलभ § Sulabh said...

उफ्फ्फ ये तमन्नायें ...!!

होती नही पूरी

वन्दना said...

वाह्……………………बहुत ही रोमानी रचना है………………प्रेम मे भीगी हुई।

Shah Nawaz said...

"दिल की दीवारों पर टंगी तेरी तस्वीर में ,
प्रेम की कुंची से इन्द्रधनुषी रंग बुनता हूँ,
हसरते यों तो बहुत रखे था दिल में पाले,
न जाने क्यों ये तमन्नायें होती पूरी नही !"


बहुत खूब!............

दिगम्बर नासवा said...

Ume jalwon mein guzar ho ...
ye jaroori to nahi ...

Padh kar Jagjeet ji ki ye GAZAL barbas yaad aa gayi ...

honesty project democracy said...

अच्छी सोच और उम्दा प्रस्तुती /

M VERMA said...

मेरे दिल में रखने की आदत बुरी है,
हर ख्वाब दिल के कोने में सजाता हूँ,

दिल है कि मानता नहीं
बहुत अच्छी रचना

AlbelaKhatri.com said...

waaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah

acchhi lagi

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

अक्सर ही ख्वाब तुम्हारे सजाने को,
हरदम आँखे चुराता हूँ रातों को नींद से,
बनाई ख़्वाबों ने जब भी तस्वीर तेरी,
पहुंचाई मुकाम पर है, छोडी अधूरी नहीं !

यह काम बहुत ही बढ़िया किया आपने!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

चुभन अभी भी है!

मनोज कुमार said...

मेरे दिल में रखने की आदत बुरी है, हर ख्वाब दिल के कोने में सजाता हूँ,
इजहार-ए-इश्क मेरी पलकें कर लेती है , हर बात लबों पे आये, ये जरूरी नहीं !
वाह!!
(इससे ज़्यादा कुछ नहीं। सब कहना ज़रूरी है का।)

दिलीप said...

bahut sundar...

अजय कुमार said...

खूबसूरत इजहार

सुनील दत्त said...

सुन्दर प्रसतुति

विनोद कुमार पांडेय said...

इर्द-गिर्द सदा ही घूम पाता, मैंने तो
तुमसे वो धूरी चाही थी, दूरी नहीं,
दिल की बात हम हक़ से कह जाते,
वो सहभागिता चाही थी, मजबूरी नहीं !


क्या बात कही गोदियाल जी बहुत बढ़िया लगा...बेहद खूबसूरत मुक्तक..हमें तो बहुत अच्छी लगी विशेष रूप से पहली चार लाइनें बाकी भी बढ़िया है..प्रस्तुति के लिए बधाई

जी.के. अवधिया said...

सुन्दर अभिव्यक्ति!

("मेरे दिल में रखने की आदत बुरी है,"

अजी आजकल ये आदत तो सभी में पाई जाती है, दिल में रख लेते हैं और मौका मिलने पर ....)

अरुणेश मिश्र said...

लाजबाब । यह नेताओँ की आदतों का वैश्वीकरण ।

अरुणेश मिश्र said...

कितनी चाह अब भी शेष ? अच्छी रचना ।

Arshad Ali said...

सुन्दर रचना !!

उम्दा काम