Wednesday, May 5, 2010

तू सच क्यों बोलता है ?

एक पुरानी कविता बस यूँ ही याद आ गई , अगर आपने पहले न पढी हो थोड़ा सा लुफ्त आप भी उठाइये ;

छल-कपट है जिस जग में
अंहकार भरा हर रग-रग में !
उस जगत की सब चीजों को तू
एक ही तराजू से क्यों तोलता है ?
झूठ-फरेब भरी दुनिया में,
गोदियाल,तू सच क्यों बोलता है ?

जहां कदम-कदम पर मिथ्या धोखे
बंद हो गए सब सत्य झरोखे !
वहाँ इंसान को आज भला तू
अपने ही भाव क्यों मोलता है ?
झूठ-फरेब भरी दुनिया में,
गोदियाल, तू सच क्यों बोलता है ?

जहां निष्कलंक बन गई दीनता
है चहु दिश फैली मूल्यहीनता !
धूमिल पड़ चुके उस दर्पण में
सच्चाई को क्यों टटोलता है ?
झूठ-फरेब भरी दुनिया में, Italic
गोदियाल, तू सच क्यों बोलता है ?

सब जी रहे है यहाँ भरम में
बचा न कुछ भी धरम-करम में !
इस कलयुग के कटु-सत्य को
सरे आम क्यों खोलता है ?
झूठ-फरेब भरी दुनिया में,
गोदियाल, तू सच क्यों बोलता है ?

26 comments:

नारदमुनि said...

itna sach na bolo kee akele rah jao,char aadmi chhod dena kandha dene ke liye.narayan narayan

M VERMA said...

जहां निष्कलंक बन गई दीनता
है चहु दिश फैली मूल्यहीनता !
सच यही है
मैं तो कहूँगा कि
गोदियाल जी सच बोलते हैं

मनोज कुमार said...

सब जी रहे है यहाँ भरम में
बचा न कुछ भी धरम-करम में !
इस कलयुग के कटु-सत्य को
सरे आम क्यों खोलता है ?
झूठ-फरेब भरी दुनिया में,
गोदियाल, तू सच क्यों बोलता है ?
हर व्यक्ति में प्रतिभा होती है| दरअसल उस प्रतिभा को निखारने के लिए गहरे अंधेरे रास्ते में जाने का साहस कम लोगों में ही होता है| अपनी अज्ञानता का अहसास होना ज्ञान की दिशा में एक बहुत बडा कदम है। इसीलिए गोदियाल सच बोलता है।

अजय कुमार said...

अपने जमीर को जिंदा रक्खा है ,इसीलिये सच बोलता है ।

दिलीप said...

harishchandra ke jamaanane lad gaye sir....bahut hi sundar aur jhakjhorti prastuti...

संजय भास्कर said...

हमेशा की तरह उम्दा रचना..बधाई.

संजय भास्कर said...

Manoj ji ne bilkul sahi kaha hai............

संजय भास्कर said...

झूठ-फरेब भरी दुनिया में,
गोदियाल, तू सच क्यों बोलता है ?

बहुत खूब, लाजबाब !

श्यामल सुमन said...

बहुत खूब गोदियाल साहब।

सच कहूँ तो कीमत चुकानी पड़े
न कहूँ तो सदा कसमसाते रहे

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

सतीश सक्सेना said...

आप भी हमारी नस्ल के हो ...बड़ा दुःख उठाओगे ! हमारी हार्दिक शुभकामनायें !

विनोद कुमार पांडेय said...

गोदियाल जी यह बिल्कुल सच है कि झूठ बोलने वाले बहुत बढ़ गये है ..मगर सच को जानने वाले भी थोड़े बहुत है...बढ़िया विचार सुंदर कविता..धन्यवाद

Udan Tashtari said...

गोदियाल, तू सच क्यों बोलता है ?

-यही तो मैं भी सोच रहा हूँ कि गोदियाल सच क्यों बोलता है??

SANJEEV RANA said...

bahut khoob

इस्लाम की दुनिया said...

महान पोस्ट !!!
मेरे ताजे-ताजे ब्लॉग पर अवश्य पधारें

अमित शर्मा said...

bahut khoob

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

आप जैसे लोगों की ही आवश्यकता है न कि झूठे और मक्कारों की.

Shekhar Kumawat said...

shandar

bahut khub

AlbelaKhatri.com said...

यही तो मैं भी कहता हूँ

भाई गोदियाल तू सच क्यूँ बोलता है

हा हा हा हा ...........बढ़िया रचना ..........

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

वाह! बहुत खूब्!!
ईमान के पलडों में खुद को तौलता है
इसीलिए गोदियाल सच बोलता है।

राज भाटिय़ा said...

बहुत खुब जी आज के युग मै तो सच बेचारा पिसता ही है

pallavi trivedi said...

iska uttar bhi aapke andar se hi aayega....

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

बहुत की गम्भीर सवाल। पर कोई जवाब नहीं सूझ रहा।

राजेन्द्र मीणा said...

सारी बातें पढ़कर लगता है कुछ झूंठ आप भी बोलते हो .....:)

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

...सांच को आंच कहाँ?

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल said...

बहुत खूब सर!!! एक प्रश्न आप से
सच बोलना पाप है येसा है माहौल जंहा
तू सच क्यो बोलता है गोदियाल वंहाँ।।

दिगम्बर नासवा said...

सही है सच बोलना आम आदमी के लिए सबसे बड़ा अपराध है आज .......