Friday, March 11, 2011

उम्मीद !

गुल खिलेंगे, चमन गुलजार होगा,
ख़त्म यह तमाम भ्रष्टाचार होगा।
न दिलों में मैल, न राग-द्वेष होगा,
देश में हर ओर अमन,प्यार होगा।
न मुल्ला , मुथालिक न खाप होगा,
हुश्न और इश्क सबका बाप होगा।
संसद, असेम्बली के गलियारों में,
हर सत्र में तब मौसमे-बहार होगा।
गुल खिलेंगे, चमन गुलजार होगा,
देश में हर ओर अमन, प्यार होगा।।

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