Friday, March 11, 2011

सीख इस्तेमाल कागज़ की !

मुझे जाने क्यों
ऐसा रहा था दीख,
इस्तेमाल कागज़,
कोरे कागज़ को
दे रहा था यह सीख !
उपयोगकर्ता, तुम पर लिखा
पसंद न आया तो
फाड़ डालेगा,
खीज में मोड़-मरोड़कर
भाड़ डालेगा !
यही दुआ मांगो कि
तुम्हे भी कोई वैसा रचनाकार मिले,
जैसा तुम्हारा मन करे,
स्व:कृति तुममे लिपि-बद्द कर,
आकर्षक,अलंकृत जिल्द में
तरतीब से आच्छादन करे !
कितना सुख मिलता है तब,
जब कोई सालीखे से
किताब का एक-एक पन्ना पलट कर
हम तक पहुचता है ,
और पढ़कर फिर
मनमोहक जिल्द के बीच,
ताउम्र संजो के रखता है !

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