Monday, April 12, 2010

टेंशन मत लो सर जी....!

कल यानी रविवार का यह वाकया है! बंद गेट के बाहर कुछ लोग खड़े जोर-जोर से बाते कर रहे थे , और गेट के अन्दर मौजूद सिक्योरिटी गार्ड से उलझ रहे थे! लोग मांग कर रहे थे कि वह उन्हें अन्दर जाने देने के लिए गेट खोले ! गार्ड विनम्रता से बस एक ही वाक्य कहे जा रहा था कि सहाब ये गेट बंद है , चाभी अन्दर ऑफिस में है, अत: यह गेट नहीं खुल सकता, आप गेट नंबर दो से अन्दर जा सकते है! अपनी बौसियत दिखाते-दिखाते कुछ लोग अपनी औकात में उतर आये थे और गार्ड को एक ने बहन की गाली दे दी ! बस फिर क्या था, गार्ड भी अपना संतुलन खो बैठा और पैर से जूता निकाल लिया ! फिर एक सज्जन ने जो कुछ उस गार्ड को समझाया उसे कविता में वयाँ कर रहा हूँ ;

लगती पग-पग यहाँ दिल को ठेस है,
टेंशन मत लो सरजी, गधो का देश है !
एक कान से सुनो, दूसरे से निकाल दो,
ये भी मुमकिन न हो तो रूइं डाल दो !!
बहस करके क्यों फिजूल पालता कलेश है,
टेंशन मत लो सरजी, गधो का देश है !
किस-किस की सुनोगे और जबाब दोगे,
जिसे देखो वही ढेंचू-ढेंचू कर रहा है !
अनाज गोदामों में सड़कर बेकार हो गया,
इंसान कुत्ते की मौत भूख से मर रहा है !!
लूटता यहाँ से है, संभालता उसे विदेश है,
टेंशन मत लो सरजी, गधो का देश है !

और चलते-चलते एक कार्टून ;


बस एक आखिरी सवाल सोएब जी, क्या इस निकाह में
शरीक होने के लिए आपकी बड़ी बहन, मेरा मतलब
आपकी महाआपा आयशा जी भी आ रही है ?

16 comments:

kunwarji's said...

वयंग्य कटीला,भाव रसीला,बड़ा गजब आवेश है!
अपनी बड़ाई समझू या .....,जो भी है अर्थ विशेष है,
कभी हम सुनते है कभी सुनाते है,कि गधो का देश है!
खतरनाक वयंग्य,शोएब पर भी और सानिया के देश पर भी....

kunwar ji,

जी.के. अवधिया said...

"जिसे देखो वही ढेंचू-ढेंचू कर रहा है!"

बिल्कुल दुरुस्त!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बढ़िया व्यंग है...अच्छा कटाक्ष है...

SANJEEV RANA said...

bahut badhiya

डॉ टी एस दराल said...

हमारे टेंशन लेने से भी क्या होने वाला है ?

डॉ टी एस दराल said...

गोदियाल जी , आप तो अंतर्यामी हैं।
पलक झपकते ही अहसास हो गया ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

वही कर रहा हूँ सर जी!

दिगम्बर नासवा said...

बहुत सहला सहला कर मारा है ... ग़ज़ब का व्यंग है गौडियाल जी ....
बहुत अच्छा लगा ...

सुनील दत्त said...

वयंग्य कटीला,भाव रसीला,बड़ा गजब आवेश है!
अपनी बड़ाई समझू या .....,जो भी है अर्थ विशेष है,
कभी हम सुनते है कभी सुनाते है,कि गधो का देश है!
खतरनाक वयंग्य,शोएब पर भी और सानिया के देश पर भी....
यही कहना चाहता था वस शब्द कुंवर जी के हैं।

'अदा' said...

वाह गोदियाल साहेब !!
ये तो महाव्यंग है...
बहुत अच्छे ...

मनोज कुमार said...

अनाज गोदामों में सड़कर बेकार हो गया,
इंसान कुत्ते की मौत भूख से मर रहा है !!
विचारोत्तेजक!

मो सम कौन ? said...

गोदियाल जी, सही कहा। टेंशन लेने से क्या होगा।

@कार्टून:= एक जोक था, हवाई आतिशबाजी वाला, सुना है आपने? हे बोल्डनेस, तू कब आयेगी? इशारों से काम चलाना पड़ रिया है।

संजय भास्कर said...

गोदियाल जी, सही कहा। टेंशन लेने से क्या होगा।

संजय भास्कर said...

बढ़िया व्यंग है..

ajit gupta said...

हमारे भारत देश को गधों का देश मत कहो। यह हमारी भारतमाता है और हम सब इसके पुत्र है और अधिकांश अच्‍छे हैं। हम गधे नहीं हैं।

ताऊ रामपुरिया said...

गजब की कलम चलाई है आज तो सरजी, आनंद आगया.

रामराम.