Friday, January 8, 2010

बर्फबारी का मजा !

(चित्र अवधिया जी के अंगरेजी ब्लॉग Indian images से साभार)
सुबह-सुबह वह आकर बोली;
क्यों दुबके हो बिस्तर में, Lol !
चलो,चलकर घूम आते है,
कुल्लू-मनाली,स्पीती-लाहोल,
दिल्ली के fog और ठण्ड में,
ठिठुर-ठिठुरकर फायदा क्या है,
Hills पर lovely मौसम है,
देख आते है snow fall !!

अब उठ भी जावो, hurry up!
भोजन भी हम बाहर करेंगे,
ताजे-ताजे बर्फ पर बैठ,
अपनी मुहब्बत का इजहार करेंगे,
न कोई discrimination होगा,
और न gender bias चलेगा,
snow skiing resorts पे प्यार करेंगे,
और प्यार हम 'At Par' करेंगे !!

इसलिए दोस्तों,


मेरी तो हो गई जेब खाली ,
क्योंकि साथ लेकर घरवाली !
I'm on the way to Manali !!
ऐसा ही होता है , जब पड़ते है डंडे ,
Bye-बाय, see you on Monday :)

18 comments:

ताऊ रामपुरिया said...

वाह जी मनाली की यात्रा शुभ हो. बर्फ़बारी का आनंद लें और वापसी पर वहां की रपट जारी करें.

रामराम.

Suman said...

nice

डॉ टी एस दराल said...

गोदियाल जी, ये फोटो क्या पहले हनीमून का लगाया है ?
वैसे अभी तो दिल्ली ही जमने को हो रही है।
शुभयात्रा।

Arvind Mishra said...

मनाली से लौट कर बतयियेगा कैसी मना ली मनाली

महेन्द्र मिश्र said...

कुल्लू मनाली खूब घूमे शुभकामनाये मंडे को फिर मिलेंगे. बाय बाय

महेन्द्र मिश्र said...

कुल्लू मनाली खूब घूमे शुभकामनाये मंडे को फिर मिलेंगे. बाय बाय

अजय कुमार said...

अंग्रेजी और हिंदी दोनो तरह के प्रेम से ओतप्रोत रचना ।

विनोद कुमार पांडेय said...

यह स्टाइल बहुत बढ़िया लगता है आपका हिन्दी और अँग्रेज़ी दोनो भाषाओं में एक सुंदर प्रस्तुति..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

अब क्या कहूँ जी!
नाइस!

राज भाटिय़ा said...

पी.सी.गोदियाल जी, बहुत सुंदर मनाली मै मना ली अब मोजां ही मोजां, घुम आईये फ़िर बताये केसी रही आप की सुहानी यात्रा

Yashwant Mehta "Yash" said...

आपकी यात्रा मंगलमय हो। दिल्ली की सर्दी ने हमारी हालत पतली कर दी हैं।

मनोज कुमार said...

बेहद रोचक और मार्मिक व्यंग्य है।

हास्यफुहार said...

गुड ... लक ...

अजय कुमार झा said...

औन द वे टू मनाली, साथ में घरवाली, और हमें एक कविता थमा दी खाली, साथ लाना आप यादों की प्याली ॥

जी.के. अवधिया said...

जा रहे हैं मनाली!
साथ में है घरवाली!!
फिर तो खूब मजा आयेगा जनाबेआली!!!

दिगम्बर नासवा said...

आपने तो जा कर मनाली
अपनी घरवाली माना ली
हमारी घरवाली ने आपकी रचना पढ़ कर
हमको दी गाली
बोली गौडियाल जी से कुछ सीखो
हमको भी बरफ दिखा दो
मनाली न सही
आइसक्रीम ही खिला दो ...........

आपका सफ़र सुहाना हो ...........

सतीश सक्सेना said...

interesting !happy journey!!

श्री श्री साढ़े सात हजार बाबा सांडनाथ !! said...

यात्रा मंगलमय हो !!! कहीं कंदराओं बाबाजी मत जाना !! अभी उम्र ही क्या है!!!