Saturday, May 2, 2009

असमंज !

जली फिर से है दिल मे इक लौ नई
रिश्ता नया जोड़ा है इस आग ने,
बडी कशमकश मे हूँ इस बात की,
धुंआ रोशनी ने छोडा या चिराग ने ?

हैं कौन सी अजब ये उलझने,
सब्ज ये नया जोड़ा है इस बाग ने ,
बडी कशमकश मे हूं इस बात की,
धुंआ रोशनी ने छोडा या चिराग ने ?

है कौन सी राह दिखा रही रोशनी
सततता को तोडा है, किस राग ने,
बडी कशमकश मे हूं इस बात की,
धुंआ रोशनी ने छोडा या चिराग ने ?

इठ्लाने लगा फिर वह चाल-चलन
जिसे राह से मोडा है इक दाग ने,
बडी कशमकश मे हूं इस बात की,
धुंआ रोशनी ने छोडा या चिराग ने ?

क्यो किये है विचलित इस तरह
रिश्ता क्यो जोडा है इस भाग ने?
बडी कशमकश मे हूं इस बात की,
धुंआ रोशनी ने छोडा या चिराग ने ?

1 comment:

Anonymous said...

eh. bookmarked style!