Wednesday, May 6, 2009

महिमा-मंडन,जूते बनाने वाले का !

हो तेरा भला रहे तू हट्टा-कठ्ठा
साख पर कभी न लगे तेरी बट्टा,
सरेआम न कोई तेरी पगडी उछाले
क्या अदभुत अस्त्र है बनाया तूने ,
शाबाश रे जूता बनाने वाले !

डराते थे,जो कल तक बड़े-बड़े शस्त्र से
डरते है वो भी आज इस अमेध अस्त्र से
इन्द्रचक्र,सौरचक्र सभी फीके कर डाले,
क्या अदभुत अस्त्र है बनाया तूने ,
शाबाश रे जूता बनाने वाले !


नेता अब जूते से डरने लगे,
रहते है सब कुम्भकरण जगे-जगे,
पत्रकार सम्मलेन में भी पड़ गए लाले,
क्या अदभुत अस्त्र है बनाया तूने ,
शाबाश रे जूता बनाने वाले !

प्रत्याशी के हाथ में चुनाव का पर्चा है
हर जुबां पर तुम्हारी ही चर्चा है,
फूल वालो की दूकान पर पड़ गए ताले,
क्या अदभुत अस्त्र है बनाया तूने ,
शाबाश रे जूता बनाने वाले !

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