Thursday, October 29, 2009

हमको हमारी खाक न मिली !

नापाक जिन्दगी को कोई पाक न मिली,
दिल-ए-गम को हमारे कोई धाक न मिली !
दे पाये कहीं पर वास्ता, जिसके प्यार का,
बदकिस्मती कह लो कि वो इत्तेफाक न मिली !!

मुद्दतो से पाला था जहन में इक हसीं ख्याल,
कि लिखवाएंगे इक सुन्दर नज्म कभी तो!
ज्यूँ श्यामपट्ट, दिल टाँगे भी रखा सीने पर,
लिखने को मगर इक अदद चाक न मिली !!

लिखकर भेजे थे जो प्यार के चंद अल्फाज,
जिन्होंने इक कागज़ के टुकड़े पर कभी हमको !
उम्र गुजर गई ख़त की राह तकते-तकते,
मगर कम्वक्त अब तक हमको वो डाक न मिली !!

बड़ी सिद्दत से ढूंढ तो लाये थे एक सुन्दर सा,
हीरे मोतियों से जडा नथनियाहार उनके लिए !
और ख्वाबो में खूब सजाया भी उस मुखड़े पर,
हकीकत में सजा पाते, ऐसी कोई नाक न मिली !!

धूँ-धूँ कर जलता हुआ तो सबने देखा था यहाँ,
तेरा वो सुन्दर सपनो का आशियाना, गोदियाल !
मौका-ए-वारदात पर लाख तलाशा भी मगर,
अब तक वहाँ से तुम्हारी कोई ख़ाक न मिली !!

13 comments:

महफूज़ अली said...

wah! bahut achcchi lagi yeh ghazal ..... dil ko chhoo gayi....
नापाक जिन्दगी को कोई पाक न मिली,
दिल-ए-गम को हमारे कोई धाक न मिली !
दे पाये कहीं पर वास्ता, जिसके प्यार का,
बदकिस्मती कह लो कि वो इत्तेफाक न मिली !!
in panktiyon ne to man hi moh liya....

ललित शर्मा said...

बहुत सुगढ-सुंदर-सरल-सरस कविताई
आपको हार्दिक बधाई

अजय कुमार said...

उम्र गुजर गई ख़त की राह तकते-तकते,
मगर कम्वक्त अब तक हमको वो डाक न मिली !!

bahuton ko aisa intzar hai

निर्मला कपिला said...

बहुत अच्छी रचना है शुभकामनायें

ओम आर्य said...

धूँ-धूँ कर जलता हुआ तो सबने देखा था यहाँ,
तेरा वो सुन्दर सपनो का आशियाना, गोदियाल !
मौका-ए-वारदात पर लाख तलाशा भी मगर,
अब तक वहाँ से तुम्हारी कोई ख़ाक न मिली !!
आज मैने आपकी रचना मे संजीदाभाव को संजीदा श्ब्द मे सजते देखा ............और श्ब्द ही नही मिल रहे है इसको मै खुद मह्सूस कर पा रहा हूँ...........

संगीता पुरी said...

वाह .. बहुत बढिया !!

दिगम्बर नासवा said...

मगर कम्वक्त अब तक हमको वो डाक न मिली ...

vaah godiyaal sahab .......... khoob samaa baandha है आपने .......... bhaavok बात को sahaj हो कर भी कह दिया .......... बहुत ही acchha लगा ......

वाणी गीत said...

ज्यूँ श्यामपट्ट, दिल टाँगे भी रखा सीने पर,
लिखने को मगर इक अदद चाक न मिली !!
दिल पर लिखने के लिए चाक की नहीं जज्बात की जरुरत है ..

M VERMA said...

ज्यूँ श्यामपट्ट, दिल टाँगे भी रखा सीने पर,
लिखने को मगर इक अदद चाक न मिली !!
बहुत ही सुन्दर! पर चाक की क्या बिसात जो लिख सके दिल से उपजे नज़्म को.

अम्बरीश अम्बुज said...

मुद्दतो से पाला था जहन में इक हसीं ख्याल,
कि लिखवाएंगे इक सुन्दर नज्म कभी तो!
ज्यूँ श्यामपट्ट, दिल टाँगे भी रखा सीने पर,
लिखने को मगर इक अदद चाक न मिली !!
kya baat hai.. bahut khoob..

श्रीश पाठक 'प्रखर' said...

आज तो गोदियाल साहब ने कहर ढा दिया..

Mishra Pankaj said...

बहुत बढिया !!

Udan Tashtari said...

सब बोल गये, तब हम चले आ रहे हैं खरामा खरामा इतनी बेहतरीन रचना पर. धत है हम पर.