
सिकवे जुबाँ पे आये जब, हम ओंठों को सी लिए ,
दिल से निकले जो अश्क थे, वो आँखों ने पी लिए!
जुल्म-ए-सितम छुपाये, न तुम्हे अपने गम दिखाए,
हर बात को सह गए, इक तेरी बात का यकीं लिए!!
खुशियों के कारवां गुजर गए, बीच राह में छोड़कर,
वो भी कहाँ तक चलते, संग अपने ऐसा बदनशीं लिए!
गले मौत भी लगा जाते, मरने के बहाने लाख थे,
गफलत में सही, तस्सली है कुछ पल तो जी लिए!!
1 comment:
किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।
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