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Thursday, February 5, 2009

वेलेंटाईन डे की सुनहरी यादे !

प्यार जताने की चाह
जब हमारे दिल में आई,
हमने जोर की ली अंगड़ाई ,
क्रान्तिकारी योजना बनाई,
अगले ही वेलेंटाईन-डे पर,
भेज दिया एक बड़ा सा,
गोभी का फूल उनके घर,

 उसी शाम किसी ने फिर
मेरा दर खटखटाया था,
संदेशवाहक के मार्फत,
उनका जबाब आया था,
चंद शब्दों में लिखा था;
मधुर-सुहानी इस भोर पर, 
जरूरी सारे काम छोड़कर,
इतना तकल्लुफ  क्यों उठाया,
एसएम्एस में ही खा लेते गोते,
अगर खर्चा कर ही लिया था,
तो मूर्ख!  दो चार आलू भी
साथ में भेज दिए होते  !!

Wednesday, January 14, 2009

अनिष्ट से आशंकित एक कलि !

देश की धड़कन दिल्ली में
हुमायु की कब्र के पास,
इक  छोटे से उपवन में
बैठी थी एक कलि उदास !

कलि  कुछ पल में खिलकर,
फूल बनने के दर पर थी,
उज्जवल भविष्य की चाहते, 
ढेरों उसके मस्तिष्क पर थी !

तभी आ गया वहाँ का माली
उपवन के पौधों को पानी देने,
साथ में लिए अपनी घरवाली,
और लगा उससे यह कहने !

फलां नेता बीमार बड़ा है
बचने की उम्मीद क्षणिक है,
कबसे मृत्यु शय्या पर पड़ा है
उठ जाने की आशा  अधिक है !

फूलो की मांग अधिक होगी
या खुदा ! कल धूप खूब खिले,
धूप से कलिया पोषित होंगी
और बगिया से ढेरो फूल मिले !

सहम गई वह कलि बेचारी
माली की सुनकर यह बात,
रोती थी देख स्व-लाचारी
दुआ करे वो,  हो लम्बी रात !

मागने लगी आशीष खुदा से, प्रभु !
फिजा छादो मुझे न खिलने देना,
भ्रष्ट नेताओ  के जनाजे पर, हे हरी !
फूल  कोई न हरगिज डलने देना !!

Friday, December 26, 2008

हद-ए-झूठ !

रंगों की महफिल में
सिर्फ़ हरा रंग तीखा,
बाकी सब फीके !
सच तो खैर,इस युग में
कम ही लोग बोलते है ,
मगर झूठ बोलना तो कोई
इन पाकिस्तानियों से सीखे !!


झूठ भी ऐंसा कि एक पल को,
सच लगने लगे !
दिमाग सफाई के धंधे  में इन्होने
न जाने कितने युवा ठगे !!
गुनाहों को ढकने के लिए,
खोजते है रोज नए-नए तरीके !
सच तो खैर, इस युग में
कम ही लोग बोलते है,
मगर झूठ बोलना तो कोई
इन पाकिस्तानियों से सीखे !!


जुर्म का अपने ये
रखते नही कोई हिसाब !
भटक गए राह से अपनी,
पता नही कितने कसाब !!
पाने की चाह है उस जन्नत को
मरके, जो पा न सके जी के !
सच तो खैर, इस युग में
कम ही लोग बोलते है ,
मगर झूठ बोलना तो कोई
इन पाकिस्तानियों से सीखे !!


इस युग में सत्य का दामन,
यूँ तो छोड़ दिया सभी ने !
असत्य के बल पर उछल रहे है,
आज टुच्चे और कमीने !!
देखे तो है बड़े-बड़े झूठे,
मगर देखे न इन सरीखे !
सच तो खैर, इस युग में
कम ही लोग बोलते है ,
मगर झूठ बोलना तो कोई
इन पाकिस्तानियों से सीखे !!


दहशतगर्दी के इस खेल में
मत फंसो मिंया जरदारी !
पड़ ना जाए कंही तुम्ही पर
तुम्हारी यह करतूत भारी !
करो इस तरह कि तुम्हारी
कथनी व करनी में फर्क न दीखे !
सच तो खैर, इस युग में
कम ही लोग बोलते है,
मगर झूठ बोलना तो कोई
इन पाकिस्तानियों से सीखे !!

जिसकी लाठी उसकी भैंस !

सबल और निर्बल के मध्य,  
आज दंगल का  खेल सारा है !
बलशाली जश्न में मदहोश,
निर्बल लाचार, थका-हारा है !!

दुबले को नसीब होती  है,
लज्जा, लाचारी, कलंक, खेद !
बाहुबली  की जेब में गए,
सारे  साम, दाम, दंड, भेद !!

चाह किसे नहीं मगर दुर्बल,
वक्त और हालात का मारा है !
सबल और निर्बल के मध्य,  
 आज दंगल का खेल सारा है !!

भूमंडलीकरण के दौर में,
बेचारा स्वदेशी बह चला है!
पूंजीवाद,साम्यवाद के बीच,
बस दिखावे का फासला है !


देशी छोड़ो, विदेशी अपनावो,
यही सभ्य समाज का नारा है !
सबल और निर्बल के मध्य,  
आज दंगल का खेल सारा है !!

Monday, September 8, 2008

ये बताओ !

गरमा-गरम बहस के बीच 
मैंने पूछा,
अच्छा ये बताओ ,
वो जो
कश्मीर में फूटा था,
वो कैसे हुआ ?
वह बोला,
भूख से फूटा था,
भूख से !
अरे, भूख से भी
कोई बम फूटता है क्या ?
कौतुहल से मैंने पूछा,
भावहीन चेहरा लिए 
वह बोला,
सारे बमों का 'ट्रिगर'
भूख ही होता है, मूर्ख !
हादसे में मरने वाले भी भूखे थे,
और मारने वाले भी !
बस, भूख के मायने अलग थे
दोनों के लिए !
मरने वाले का पेट खाली था,
और मारने वाले का दिमाग !